दिल के आकार से मिलता-जुलता लाल और हरे रंग का सिंघाड़ा पानी में पैदा होता
है. यह एक मौसमी फल है और इसमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इन
दिनों कई तरह की बीमारियों से बचाने में कारगर होते हैं. सिंघाड़े का
इस्तेमाल कई तरह किया जाता है. कुछ लोग इसे कच्चा खाना ही पसंद करते हैं और
कुछ उबालकर. कई जगहों पर इसे सब्जी के तौर पर भी प्रयोग में लाया जाता है.
व्रत आदि के मौके पर इसके आटे का इस्तेमाल किया जाता है. सिंघाड़े में
पर्याप्त मात्रा में पोटैशियम, जिंक, विटामिन बी और ई पाया जाता है. आयुर्वेद में इसके कई फायदों का जिक्र है.
1. सिंघाड़ा शरीर को ठंडक प्रदान करने का काम करता है. यह प्यास को
बुझाने में भी कारगर होता है. दस्त होने पर इसका सेवन करना फायदेमंद रहता
है.
2. सिंघाड़े का इस्तेमाल रोजाना की डाइट में किया जा सकता है. इनमें उच्च मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं और कम कैलोरी होने के कारण भी यह स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
3. इनमें डीटॉक्सिफाइंग गुण पाया जाता है. ऐसे में अगर किसी को
पीलिया है तो सिंघाड़े का इस्तेमाल उसके लिए बहुत फायदेमंद होगा. यह शरीर
में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी कारगर है.
4. सिंघाड़े में आयोडीन और मैगनीज जैसे कई प्रमुख मिनरल्स होते हैं जो थॉयरॉइड ग्लैंड की सक्रियता को बूस्ट करने का काम करते हैं.
5. इसमें पॉलीफेनॉलिक और फ्लेवोनॉयड एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं.
इसके अलावा ये एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-कैंसर गुणों से भी
भरपूर होता है. साथ ही यह अनिद्रा की समस्या को दूर करने में भी सहायक होता
है.
6. सिंघाड़े के इस्तेमाल से यूरीन से जुड़ी कई समस्याओं में भी फायदा होता है.
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