Monday, 28 December 2015

अंगूर Grapesका रस सेवन से याददाश्त का विकास होता है।

अंगूर को सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है, क्योंकि ये पोषक तत्वों से भरपूर फल है। यह शारीरिक बल को बढ़ाने वाला माना जाता है। अंगूर का वानस्पतिक नाम विटिस विनीफेरा है। अंगूर के औषधीय गुणों को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह फल रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
100 ग्राम अंगूर में लगभग 85.5 ग्राम पानी,10.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स,0.8 ग्राम प्रोटीन,0.1 ग्राम वसा 0.03 ग्राम कैल्शियम, 0.02 ग्राम फॉस्फोरस,0.4 मिलीग्राम आयरन, 50 मिलीग्राम विटामिन,10 मिलीग्राम विटामिन सी, 8.4 मिलीग्राम विटामिन पी,100 से 600 मिलीग्राम टैनिन , 0.72 ग्राम टार्टरिक अम्ल पाया जाता है। इसके अलावा सोडियम क्लोराइड,पोटैशियम क्लोराइड ,पोटाशियम सल्फेट और एल्युमिन व अन्य कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। चलिए आज जानते है अंगूर से जुड़े कुछ पारंपरिक नुस्खों के बारे में..
1. डांग गुजरात के आदिवासी मानते है कि रोजाना सुबह और शाम 4-4 चम्मच अंगूर रस भोजन के बाद सेवन किया जाए तो बुद्धि और याददाश्त का विकास होता है।

2. अंगूर शरीर में क्षारीय तत्व को बढ़ा देता है। इसके सेवन से मोटापा,जोड़ों का दर्द, खून का थक्का जमना,दमा और त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना आदि परेशानियां दूर हो जाती हैं। अंगूर का सेवन आंत ,लीवर पाचन संबंधित दिक्कतों,खून की उल्टी होना,कब्जियत, मूत्र की बीमारी, अतिसार,कृमी रोग ,टीबी आदि रोगों में विशेष रूप से लाभकारी होता है ।

3. खून की कमी होने पर अंगूर के एक गिलास जूस में दो चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से पीने पर खून की कमी दूर हो जाती है।
 . एक अध्ययन से पता चला है की अंगूर ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में मदद करता है। अंगूर में एंटी कैंसर तत्व उपस्थित होते हैं,जो कि कैंसर की रोकथाम में मददगार साबित होते हैं।
5. रोज सुबह 200 ग्राम अंगूर का रस या ताजे अंगूर खाने से पथरी पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर हो जाती है। डांग के आदिवासी यही फार्मुला माइग्रेन के रोगियों के लिए रामबाण मानते हैं।
6. अंडकोषों (टेस्टीकल्स) की सूजन दूर करने के लिए आदिवासी अंगूर के कुछ पत्तों पर घी चुपड़कर पत्तों को गर्म कर लेते हैं। हल्के गर्म पत्तो से अंडकोषों की सिकाई करते हैं, जिससे सूजन उतर जाती है।

7. पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगों दें। सुबह मसल कर निचोड़ें और इस रस में थोड़ी चीनी मिलाकर पिएं, आराम मिलेगा।

8. अंगूर फोड़े-फुंसियों और मुहांसों को सुखाने में सहायता करता है। अंगूर के रस के गरारे करने से मुंह के घावों और छालों में राहत मिलती है।
9. अंगूर और मौसमी के जूस को समान मात्रा में मिलाकर लेने से मासिक धर्म की अनियमितता दूर हो जाती है।

10. लगभग 50 ग्राम अंगूर का रस गर्म करके दमा के रोगी को पिलाएं। इससे रोगी की सांस लेने की गति सामान्य हो जाती है। ऐसा करीब एक माह तक करके जरूर देखा जाना चाहिए।

11. कई आदिवासी अंचलों में बच्चों को दांत निकलते समय अंगूर के रस में शहद डालकर दिया जाता है। ऐसा करने से दांत जल्द निकल आते हैं और दर्द भी कम होता है।

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