Monday, 29 February 2016

बालों की सभी समस्याओं से निजात दिलाएगा लहसुन

लहसुन एक चमत्कारी औषधि है जो बालों की सभी समस्याओं से निजात दिलाएगा | लहसुन का प्रयोग कब और कैसे करें
प्राचीन काल से लहसुन का इस्तेमाल बालों के उपचार के लिए किया जाता आ रहा है। आइए जानें बालों की समस्‍याओं से बचने के लिए लहसुन कैसे मदद करता है।
1 बालों के लिए लहसुन
आजकल लोग खराब जीवनशैली, खान-पान, प्रदूषित वातावरण, हार्मोनल के बदलाव आदि के कारण बालों के झड़ने की समस्या बहुत आम हो गई है। हालांकि 100 बालों का रोज झरना सामान्‍य है। लेकिन समस्या तब आती है जब आपके बाल झड़ने के अनुपात में बढ़ते नहीं है। तब आप गंजे भी हो सकते हैं। वैसे तो बाजार में कई शैंपू, सीरम और तेल मौजूद हैं जो कुछ ही दिनों में बालों की वृद्धि की गारंटी देते हैं। लेकिन इसमें मौजूद केमिकल के कारण बालों को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। तो क्यों न आप कुछ घरेलु उपचार करें? जो ज्‍यादा खर्च किये बिना बालों को झड़ने से रोकने में मददगार होते हैं। बालों की समस्याओं से बचने के लिए लहसुन का इस्तेमाल कारगर होता है। प्राचीन काल से लहसुन का इस्तेमाल बालों के उपचार के लिए किया जाता आ रहा है। आइए जानें बालों की समस्‍याओं से बचने के लिए लहसुन कैसे मदद करता है।
2लहसुन इस्‍तेमाल का तरीका
लहसुन की कली से रस निकालकर उसे नारियल के तेल में मिलाकर थोड़ा सा गर्म करें। थोड़ा सा ठंडा होने पर इससे सिर की मसाज करें और एक घंटा ऐसे ही लगा रहने दें। आप चाहे तो इस मिश्रण को रातभर लगा कर रख सकते हैं। इससे आपको अच्‍छा परिणाम मिलेगा। या आप लहसुन को कूचल कर सोने से पहले इसे बालों में उस जगह पर लगाये जहां बाल झड़ रहे हों। फिर ऑलिव ऑयल से मसाज करें और बालों को शॉवर कैप से ढक लें। अगले दिन बालों को अच्‍छे से धो लें। इसके अलावा आप लहसुन का रस निकालकर अपने शैम्‍पू में मिला सकते हैं। आप लहसुन के रस में शहद और अदरक मिला कर सीरम भी बना सकते हैं ताकि लहसुन का गंध चला जाए।
3बालों को झड़ने से रोकें
लहसुन के इस्‍तेमाल से बालों के झड़ने की समस्‍या को रोका जा सकता है, यह न केवल बालों को झड़ने से रोकता है बल्कि नये बाल उगने में भी मदद करता है। लहसुन में सल्फर की अधिक मात्रा होती है जो बालों को बढ़ाने वाले केरेटिन को बनाने में मदद करता है। साथ ही बाल सुन्दर और स्वस्थ भी बनते हैं।
4स्‍कैल्‍प को साफ रखें और संक्रमण ठीक करें
स्‍कैल्‍प के गंदे होने से भी बाल झड़ते हैं। सिर्फ शैम्पू करना काफी नहीं होता। लहसुन से सिर से सारे कीटाणु और धूल का सफाया हो जाता है। अगर आपके सिर में खुजली हो रही हो तो लहसुन एक असरदार उपाय हो सकता है। स्‍कैल्‍प में किसी भी तरह का संक्रमण बालों के झड़ने का प्रमुख कारण है। लहसुन में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो किसी भी तरह के कीटाणु, फफूंदी या खमीर से हुए संक्रमण से निजात दिलाता है। लहसुन परजीवी के असर को भी हटाता है।
5बालों की जड़ को मजबूत बनायें
बालों की जड़ों को मजबूत बनाने के लिए लहसुन काफी कारगर सिद्ध होता है। इसमें सल्फर ज्‍यादा मात्रा में होती है जो असमय बालों के टूटने को रोकता है और बालों के रोम छिद्र को अधिक मजबूत बनाता है
6पोषण प्रदान करता है
असंतुलित खान-पान का असर आपकी सेहत के साथ बालों पर भी पड़ता हैं और उनको ठीक से पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में लहसुन इस कमी को पूरा कर आपके बालों के रोमछिद्र को पोषण देता है। जिससे आपके बाल पोषित होते हैं।

Saturday, 27 February 2016

सहजन के पत्ते का पाउडर कैंसर और दिल के रोगियों के लिए एक बेहतरीन दवा है।

कमाल की दवा है सहजन, इन बड़ी बीमारियों में करती है रामबाण का काम

सहजन या सुजना एक बहुत उपयोगी पेड़ है। इस सेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। इसे अंगे्रजी में ड्रमस्टिक भी कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में भी सहजन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है। दक्षिण भारत में व्यंजनों में इसका उपयोग खूब किया जाता है। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसीलिए आज हम आपको परिचित करवाने जा रहे हैं। सहजन की कुछ खास उपयोगिताओं व इसके गुणों से ......
1- सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्सियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्सियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर सहजन इतने औषधीय गुणों से भरपूर है कि उसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह सिर्फ खाने वाले के लिए ही नहीं बल्कि जिस जमीन पर यह लगाया जाता है। उसके लिए भी लाभप्रद है। यह जमीन को उपजाऊ बनाता है।
2- सहजन पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म कर देता है। हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस होने पर इसके पत्ते का ताजा रस, एक चम्मच शहद, और नारियल पानी मिलाकर लें, यह एक उत्कृष्ट हर्बल दवाई है।
- सहजन के पत्ते का पाउडर कैंसर और दिल के रोगियों के लिए एक बेहतरीन दवा है। यह ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है।इसका प्रयोग पेट में अल्सर के इलाज के लिए किया जा सकता है। यह पेट की दीवार के अस्तर की मरम्मत करने में सक्षम है। यह शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ा देता है।

3- सहजन की पत्ती इसके बीज में पानी को साफ करने का गुण होता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है ।
4- कुपोषण पीड़ित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान माना गया है। सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। इसका काढ़ा साइटिका रोग के साथ ही, पैरों के दर्द व सूजन में भी बहुत लाभकारी है।
5- इसका जूस प्रसूता स्त्री को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है। सहजन की पत्तियों के साथ ही सजहन का फल विटामिन्स से भरा होता है। सहजन में विटामिन ए होता है इसीलिए यह सौन्दर्यवर्धक के रूप में काम करता है। साथ ही, यह आंखों के लिए भी लाभदायक होता है।
6- पिंपल्स की प्रॉब्लम हो तो सहजन का सेवन करना चाहिए। इसके सूप से शरीर का खून साफ होता है। चेहरे पर लालिमा आती है और पिंपल्स की समस्या खत्म हो जाती है। सहजन की पत्तियों से तैयार किया गया सूप तपेदिक, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस आदि रोगों में भी दवा का काम करता है।
7-इसमें कैल्सियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है। इसीलिए महिलाओं व बच्चों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें जिंक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि पुरुषों की कमजोरी दूर करने में अचूक दवा का काम करता है। इसकी छाल का काढ़ा और शहद के प्रयोग से शीघ्र पतन की बीमारी ठीक हो जाती है और यौन दुर्बलता भी समाप्त हो जाती है।
8- सहजन में ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एक तरह का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। साथ ही सहजन में विटामिन सी बहुत मात्रा में होता है। यह कफ की समस्या में भी रामबाण दवा की तरह काम करता है। जुकाम में सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकडऩ कम होगी।

Thursday, 25 February 2016

9 लाभ सुबह गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने के...

9 लाभ सुबह गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने के...
इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है। शहद को गर्म पानी के साथ लेने से वजन कम होता है। और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है। हम आपके लिए लेकर आए हैं गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन करने के फायदों के बारे में ...

पाचन सुधारे
अच्छे पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना चाहिए। यह पेट को साफ करने में मदद करता है। यह लीवर में रस के उत्‍पादन को बढ़ाता है जिससे पाचन में मदद मिलती है। नींबू में मौजूद एसिड आपके पाचन तंत्र में मदद करता है और अवांछित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा शहद एक एंटीबैक्‍टीरियल के रूप में कार्य करता है और आपके शरीर में मौजूद किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है।

कब्‍ज दूर करें
यह मिश्रण कब्‍ज के लिए तत्‍काल उपाय है। यह आंत को प्रोत्‍साहित कर मल त्‍यागने में मदद करता है। इसके अलावा यह आंत्र म्‍यूकस में बढ़ावा देता है, पेट को हाइड्रेट करता है और सूखे मल को पानी में भिगो देता है। इन सब की एक साथ मौजूदगी से मल त्‍यागने में मदद करता है

लसीका प्रणाली की सफाई में मददगार
लसीका प्रणाली में पानी और आवश्यक तरल पदार्थ की कमी हो जाती है जिससे आपको सुस्त और थका हुआ महसूस होना, कब्ज, सोने में परेशानी, उच्च या निम्न रक्तचाप, तनाव और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर असर पड़ता है। सुबह-सुबह इस मिश्रण को पीने से लसीका प्रणाली को हाइड्रेट होने में मदद मिलती है जिससे न केवल सभी उपरोक्त लक्षणों बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है

मौखिक स्वास्थ्य में सुधार
एसिडिक प्रकृति का नींबू, शहद और गुनगुने पानी के साथ सांसों की बदबू को तुरंत दूर करने में मददगार होता है। नींबू अपनी लार ग्रंथियों को सक्रिय और आक्रामक बैक्टीरिया को मार कर मुंह शुद्ध करने में मदद करता है। सांस में बदबू का कारण जीभ पर सफेद परत का गठन (मुख्य रूप से खाद्य और बैक्टीरिया से मिलकर) भी है, यह रस इस परत को प्रभावी ढंग से हटाकर सांस की बदबू से प्राकृतिक रूप से छुटकारा दिलाता है

मूत्रवर्धक के रूप में कार्य
शहद में बहुत ही शक्तिशाली एंटी-बैक्‍टीरियल के गुण होते हैं। इसमें कई प्रकार के संक्रमण को दूर करने की क्षमता होती है। नींबू और पानी के साथ यह मिश्रित – एक उत्कृष्ट मूत्रल (आपके शरीर से पानी बाहर निकलवाने वाला एजेंट) के रूप में कार्य करता है। यह आपके मूत्र मार्ग को साफ करने का सबसे अच्छा तरीका है। यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) से पीड़‍ित महिलाओं के लिए यह रस एक वरदान की तरह है क्‍योंकि यह संक्रमण को दूर करने में मदद करता हे।

एनर्जी लेवल बढ़ाये
शहद और गर्म पानी से शरीर में एनर्जी में भी वृद्धि होती है। शरीर में ज्यादा एनर्जी उत्पन्न होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म और कार्यप्रणाली में भी वृद्धि होती है। शहद शरीर के अंगों को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है। सुबह में गर्म पानी नींबू के साथ लेने से आप दिन भर ऊर्जावान बने रह सकते हैं

वजन घटाने में मददगार
शहद और नींबू के साथ गर्म पानी लेने से भूख कम लगती है। शहद और नींबू के साथ गर्म पानी में बड़ी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जो भूख की इच्छा और शूगर लेवल को कम करके पर्याप्त एनर्जी प्रदान करता है। इस‍ तरह से नियमित रूप से सुबह इसका सेवन करने से दिन भर में आपके द्वारा लिए गए भोजन की मात्रा कम हो जाएगी। अपने दिन की शुरुआत गुनगुने पानी के साथ शहद और नींबू के साथ करने से आपका वजन काफी हद तक कम हो जाएगा।

त्‍वचा के लिए लाभकारी
त्‍वचा के लिए नींबू के लाभ अनगिनत है लेकिन इसके अलावा इसमें मौजूद क्‍लीजिंग तत्‍व रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है, नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। पानी और शहद का मिश्रण आपकी त्वचा के लिए एक अनूठा दृढ, जीवाणुरोधी और कोलेजन बढ़ाने वाले गुण होते है। इसलिए अगर आप स्वाभाविक रूप से चमकदार त्वचा चाहती हैं तो यह पेय आपके लिए बहुत लाभकारी साबित होगा

पोषक तत्वों और विटामिन से भरपूर
शहद और नींबू के गर्म पानी में कई जरूरी एंटी-आक्सीडेंट, विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसके अलावा इसमें एंटी इफ्लेमेंटरी गुण भी मौजूद होते है। इसलिए इसके सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। साथ ही यह वजन कम करने में सहायक होती हैं

बालों के गिरने से हैं परेशान? तो अपनाएं ये 8 तरीके

तनाव, हार्मोन्स में बदलाव, मेडिकेशन ये कुछ ऐसी वजहे होती हैं जिनसे आपके बाल गिरते हैं. इसके अलावा खाने में विटामिन B1, B2, C और आयरन की कमी भी इसकी वजह है. कलरिंग और रिबॉन्डिंग जैसे केमिकल ट्रीटमेंट्स, अच्छे से इनकी देखभाल नहीं करना और स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से भी बाल गिरते हैं.
1. बालों में हर रोज़ तेल लगाएं. ये बालों को मज़बूत बनाने का सबसे बेस्ट तरीका है.
2. प्रोटीन युक्त खाना खाएं. अंडा, हरी सब्जियां, फल, दही या दूध और मसूर की तेल को अपनी डेली डाइट का हिस्सा बनाएं. और हां, ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिना ना भूलें.
3. अपने बालों को रेगुलरर्ली शैम्पू और कंडीशनर से धोएं. हो सके तो बेबी शैम्पू का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये काफी माइल्ड होता है. बालों को रिहाइड्रेट और मज़बूती देने के लिए शैम्पू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल करें, लेकिन इसे स्कैल्प पर कभी ना लगाएं
4. हर्बल का इस्तेमाल करें. इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन बालों के लिए ये काफी फायदेमंद होगा. आंवला, रीठा और शिकाकाई को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. अब इसे स्कैल्प पर लगाएं और मसाज करें. 30 मिनट बाद इसे धो लें. एक महीने तक हफ्ते में 3 बार ऐसा करें. ये आपके बालों को बढ़ने में मदद करेंगे. इसके अलावा एक कप आंवला जूस में 3 चम्मच नींबू का रस मिलाएं और स्कैल्प पर लगाएं. 30 मिनट बाद इसे नॉर्मल पानी से धो लें.
5. शैम्पू की जगह हर्बल शैम्पू इस्तेमाल करने की कोशिश करें. 15-20 करी पत्ते, एक नींबू का छिलका, 3 चम्मच शिकाकाई पाउडर, 2 चम्मच मेथी और 2 चम्मच साबूत मूंग लें. इन्हें अच्छी तरह पीस लें और स्टोर करें. शैम्पू या साबुन की जगह बाल को धोने के लिए इस मिक्सचर का इस्तेमाल करें.
6. कम होते बाल को बढ़ाने के लिए 2 चम्मच नारियल तेल और 1-1 चम्मच आंवले का रस और नींबू का रस मिलाएं. इसे हर रोज़ सोने से पहले अपने बालों पर लगाएं.
7. बालों के लिए नैचुरल कंडीशनर का इस्तेमाल करें. ऑलिव ऑयल को थोड़े शहद के साथ मिलाएं और बालों पर लगाएं. 30 मिनट के लिए इसे छोड़ दें और फिर माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें.
8. पावर पैक का करें इस्तेमाल. 2-3 चम्मच मेथी के दाने लें और 10 घंटे के लिए इन्हें पानी में भिंगों कर रखें. अब इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें. इसमें 2 चम्मच कोकोनट मिल्क मिलाएं. इस पेस्ट को अपने बाल और स्कैल्प पर लगाएं. 30 मिनट के बाद गुनगुने पानी से इसे धो लें. मोटे और घने बाल पाने के लिए इसे हफ्ते में एकबार लगाएं.

Sunday, 21 February 2016

अरबी खाने के फायदेHealth Benefits Of Taro

भारत के अलग-अलग हिस्से में अरबी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. कुछ लोग इसके पत्तों की पकौड़ी बनाकर खाना पसंद करते हैं तो कुछ इसकी सब्जी. कई जगहों पर तो इसे व्रत में फलाहार के रूप में भी खाया जाता है.आसानी से मिल जाने के बावजूद अरबी बहुत अधिक लोकप्रिय सब्जी नहीं है पर इसके फायदे चौंकाने वाले हैं. ये फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होती है. इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं.
अरबी खाने के फायदे:
1. ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं से बचाव के लिए
अरबी में सोडियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है. इसके अलावा ये पोटैशियम और मैग्नीशि‍यम के गुणों से भी भरपूर है जिसके चलते ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. साथ ही ये तनाव दूर रखने में भी मददगार है.
2. कैंसर से बचाव के लिए
अरबी में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को विकसित होने से रोकते हैं.
3. मधुमेह के रोगियों के लिए भी है बहुत फायदेमंद
अरबी में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं. अरबी खाने से इंसुलिन और ग्लूकोज की मात्रा का संतुलन बना रहता है.
4. वजन कम करने में सहायक
अरबी भूख को नियंत्रित करने का काम करती है. साथ ही इसमें मौजूद फाइबर्स मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाते हैं जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.
5. पाचन क्रिया को बेहतर रखने में
अरबी में भरपूर मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं जिसकी वजह से पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है.

शुकपुष्प जानिए इसके क्या क्या फायदे हैं।

शिरीष को शुकपुष्प भी कहा जाता है । आम भाषा में इसे सिरस भी कहते हैं । ये वृक्ष सड़क आदि के किनारे, पार्क, स्कूल आदि व भारत में सभी जगह पाए जाते हैं । इसके सुन्दर पुष्पों की भीनी भीनी महक मन को मोह लेती है । आयुर्वेद में इसका काफी योगदान है, तो जानिए इसके क्या क्या फायदे हैं।
 
  • इसके फलियों के बीजों को बकरी के दूध में पीसकर नाक में सुंघाने से मूर्छा खत्म हो जाती है ।
  • शिरीष की छाल का एक से तीन ग्राम चूर्ण शुद्ध घी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है और खून भी साफ करता है।
  • गर्मी लगने पर इसके पत्तों को कूटकर माथे पर उसका लेप कर दे। नकसीर में भी बहुत गुणकारी है।
  • उन्माद की बीमारी में मुलेठी, सौंफ, अश्वगंधा, वचा, शिरीष के बीज,इन सबको समभाग मिलाकर एक एक चम्मच सुबह शाम दें । आँख में लाली या अन्य कोई समस्या हो तो इसके पत्तों की लुगदी बनाकर उसकी टिकिया बंद आँखों पर कुछ समय के लिए रखने से लाभ होगा।
  • कान में समस्या होने पर इसकी पत्तियां गर्म करके उसका दो बूँद रस कान में ड़ाल सकते हैं।
  • खांसी होने पर इसके पुराने पीले पत्तों को देसी घी में भूनकर शहद के साथ लें।
  • दस्त लगने पर इसके बीजों का पावडर आधा ग्राम की मात्रा में लें।
  • जलोदर या लीवर इन्फेक्सन हो तो इसकी छाल का पाऊडर या काढ़ा लेना लाभकारी है।
    सोरायसिस या एग्ज़ीमा होने पर इसके पत्ते सुखाकर मिटटी की हंडिया में जलाकर राख कर लें। इसे छानकर सरसों के तेल में मिलाकर या देसी घी में मिलाकर प्रभावित त्वचा पर लगायें। इसके अतिरिक्त चर्म रोगों में इसकी दस ग्राम छाल 200 ग्राम पानी में कुचलकर रात को मिट्टी के बर्तन में भिगोयें और सवेरे छानकर पीयें।
  • बवासीर में इसके बीज पीसकर लगायें। इनके लगाने से मस्से सूख जायेंगे। सुजाक होने पर इसके पत्तों के साथ नीम के पत्तों का रस भी मिलाकर धोएं।
  • यूरिन में पस बढ़ने या बार बार urine के आने की समस्या हो तो इसकी कोमल पत्तियां पीसकर मिश्री मिलाकर पीयें या इसका काढ़ा पीजिये। माहवारी (periods) में बहुत दर्द हो तो माहवारी शुरू होने के चार दिन पहले इसकी 10 ग्राम छाल का 200 ग्राम पानी में काढ़ा बनाकर पीयें। period होने पर लेना बंद कर दें। किसी भी तरह की सूजन होने पर पत्तों को पानी में उबालकर सिकाई करें।
  • कमजोरी महसूस होती हो तो इसके एक भाग बीजों में दो भाग अश्वगंधा मिलाकर मिश्री मिला लें। इस पाऊडर को सवेरे शाम लें।

Friday, 19 February 2016

लाजवंती ( छुई मुई )बहुगुणी पौधा

लाजवंती ( छुई मुई )
छुईमुई का पौधा एक विशेष पौधा है । इसके गुलाबी फूल बहुत सुन्दर लगते हैं और पत्ते तो छूते ही मुरझा जाते हैं । इसे लाजवंती भी कहते हैं । अगर खांसी हो तो इसके जड़ के टुकड़ों के माला बना कर गले में पहन लो । हैरानी की बात है कि जड़ के टुकड़े त्वचा को छूते रहें । बस इतने भर से गला ठीक हो जाता है । इसके अलावा इसकी जड़ घिसकर शहद में मिलाये । इसको चाटने से या फिर वैसे ही इसकी जड़ चूसने से खांसी ठीक होती है । इसकी पत्तियां चबाने से भी गले में आराम आता है ।
छुई-मुई को आदिवासी बहुगुणी पौधा मानते हैं, उनके अनुसार यह पौधा घावों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए बहुत ज्यादा सक्षम होता है। इसकी जड़ों का 2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो आंतरिक घाव जल्द आराम पड़ने लगते हैं।
स्तन में गाँठ या कैंसर की सम्भावना हो तो इसकी जड़ और अश्वगंधा की जड़ घिसकर लगाएँ । इसका मुख्य गुण संकोचन का है । इसलिए अगर कहीं भी मांस का ढीलापन है तो इसकी जड़ का गाढ़ा सा काढा बनाकर वैसलीन में मिला लें और मालिश करें । anus(काँच) बाहर आता है तो toilet के बाद मालिश करें । uterus बाहर आता है तो पत्तियां पीसकर रुई से उस स्थान को धोएँ । hydrocele की समस्या हो या सूजन हो तो पत्तियों को उबालकर सेक करें या पत्तियां पीसकर लेप करें । हृदय या जिगर बढ़ गए हैं, उन्हें shrink करना है तो इस पौधे को पूरा सुखाकर इसके पाँचों अंगों (पंचांग ) का 5 ग्राम 400 ग्राम पानी में उबालें । जब एक एक चौथाई रह जाये तो सवेरे खाली पेट पी लें ।
यदि खूनी बवासीर, माहवारी या खूनी दस्त की वजह से रक्तस्त्राव ज्यादा हो रहा है तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ पीसकर उसे दही में मिलाकर प्रात:काल ले लें या इसके पांच ग्राम पंचांग का काढ़ा पियें। टॉन्सिल की परेशानी हो तो इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लेप करें । गर्भाशय में कोई विकार है तो इसके एक ग्राम बीज सवेरे खाली पेट लें । अगर मधुमेह है तो इसका 5 ग्राम पंचांग का पावडर सवेरे लें । पथरी किसी भी तरह की है तो इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पियें। पेशाब रुक रुक कर आता है या कहीं पर भी सूजन या गाँठ है तो इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पियें ।
यह पौधा बहुत गुणवान है और बहुत विनम्र भी । तभी तो इतना शर्माता है । आप भी इसे लजाते हुए देख सकते है । बस अपने गमले में लगाइए और पत्तियों को छू भर दीजिये ।

दही खाने से होते हैं Healthy फायदे

दही को हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां, जैसे अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।
1. अनिद्रा
रात में नींद न आने की परेशानी हो तो रोज खाने के साथ एक कटोरी दही का सेवन करें। धीरे-धीरे यह समस्या दूर हो जाएगी।
2. पाचन शक्ति बढ़ाता है
दही का नियमित सेवन शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है। यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है। दूध जब दही का रूप ले लेता है तब उसकी शुगर एसिड में बदल जाती है। इससे पाचन में मदद मिलती है। जिन लोगों को भूख कम लगती है। उन लोगों को दही बहुत फायदा करता है।
 
3. पेट की गर्मी दूर करता है
दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। पेट में गड़बड़ होने पर दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने या चावल में दही मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं। पेट के अन्य रोगों में दही को सेंधा नमक के साथ लेना फायदेमंद होता है।
4. आंतों के रोग
अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही के नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं।
 
5. दिल के रोग
दही में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है। यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखती है।
6. हड्डियों की मजबूती
दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है। साथ ही, दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाता है। इससे मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है।
 
7. जोड़ों के दर्द
हींग का छौंक लगाकर दही खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है।
8. बवासीर
बवासीर रोग से पीड़ित रोगियों को दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीने से फायदा मिलता है।
 
9. वजन
दुबले-पतले व्यक्तियों को अगर दही में किशमिश, बादाम या छुहारा मिलाकर दिया जाए तो वजन बढ़ने लगता है, जबकि दही के सेवन से शरीर की फालतू चर्बी को भी हटाया जा सकता है।
10. सौंदर्य
दही शरीर पर लगाकर नहाने से त्वचा कोमल और खूबसूरत बन जाती है। दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी और हाथों पर लगाने से शरीर निखर जाता है। दही की लस्सी में शहद मिलाकर पीने से सौंदर्य में बढ़ोत्तरी होती है।
 
11. बालों की सुंदरता
बालों को सुंदर और आकर्षक बनाए रखने के लिए दही या छाछ से बालों को धोने से फायदा होता है। इसके लिए नहाने से पहले बालों में दही से अच्छी मालिश करनी चाहिए।कुछ समय बाद बालों को धो लेने से बालों की खुश्की या रूसी खत्म हो जाती है।
12. मुंह के छाल
दही की मलाई को मुंह के छालों पर दिन में दो-तीन बार लगाने से छाले दूर हो जाते हैं। दही और शहद को समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
 
13. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
दही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इससे अस्थमा और एलर्जी के रोगों में फायदा मिलता है। दांतों से संबंधित शिकायतों में भी दही का सेवन लाभकारी होता है।
14. पसीना
गर्मी के दिनों में पसीना बहुत ज्यादा आता है। ऐसे में दही और बेसन के मिश्रण से मालिश करें। कुछ देर बाद नहा लें। पसीने की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
15. बच्चों के दांत
दही के साथ शहद मिलाकर जिन बच्चों के दांत निकल रहे हों, उन्हें चटाना चाहिए। इससे दांत आसानी से निकल जाते हैं।

Tuesday, 16 February 2016

नीम के ढेरों लाभ

नीम के ढेरों लाभ
चमत्कारी नीम से हजारों फायदे : अपनाएं नीम अच्छे होंगे दिन ।
घरेलू उपयोग::
नीम के वृक्ष की ठंण्डी छाया गर्मी से राहत देती है तो पत्ते फल-फूल, छाल का उपयोग घरेलू रोगों में किया जाता है, नीम के औषधीय गुणों को घरेलू नुस्खों में उपयोग कर स्वस्थ व निरोगी बना जा सकता है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है, लेकिन इसके फ़ायदे तो अनेक और बहुत प्रभावशाली हैं और उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :–
• नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
• नीम के तेल का दिया जलाने से मच्छर भाग जाते है और डेंगू , मलेरिया जैसे रोगों से बचाव होता है
• नीम की दातुन करने से दांत व मसूढे मज़बूत होते है और दांतों में कीडा नहीं लगता है, तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।
• इसमें दोगुना पिसा सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया, दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है।
• नीम की कोपलों को पानी में उबालकर कुल्ले करने से दाँतों का दर्द जाता रहता है।
• नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और चमकदार होती है।
• नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और पानी ठंडा करके उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं, और ये ख़ासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।
• चेचक होने पर रोगी को नीम की पत्तियों बिछाकर उस पर लिटाएं।
• नीम की छाल के काढे में धनिया और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया रोग में जल्दी लाभ होता है।
• नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है। जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और विषम ज्वर (मलेरिया) से बचाव होता है।
• नीम के फल (छोटा सा) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है।
• नीम के द्वारा बनाया गया लेप वालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।
• नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालें, ठंण्डा होने पर इससे बाल, धोयें स्नान करें कुछ दिनों तक प्रयोग करने से बाल झडने बन्द हो जायेगें व बाल काले व मज़बूत रहेंगें।
• नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी (कंजेक्टिवाइटिस) समाप्त हो जाती है।
• नीम की पत्तियों के रस और शहद को 2:1 के अनुपात में पीने से पीलिया में फ़ायदा होता है, और इसको कान में डालने कान के विकारों में भी फ़ायदा होता है।
• नीम के तेल की 5-10 बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फ़ायदा होता है।
• नीम के बीजों के चूर्ण को ख़ाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है।
• नीम की निम्बोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम रात को गुनगुने पानी से लें कुछ दिनों तक नियमित प्रयोग करने से कब्ज रोग नहीं होता है एवं आंतें मज़बूत बनती है।
• गर्मियों में लू लग जाने पर नीम के बारीक पंचांग (फूल, फल, पत्तियां, छाल एवं जड) चूर्ण को पानी मे मिलाकर पीने से लू का प्रभाव शांत हो जाता है।
• बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गये स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती है और ज़हर का असर कम हो जाता है।
• नीम के 25 ग्राम तेल में थोडा सा कपूर मिलाकर रखें यह तेल फोडा-फुंसी, घाव आदि में उपयोग रहता है।
• गठिया की सूजन पर नीम के तेल की मालिश करें।
• नीम के पत्ते कीढ़े मारते हैं, इसलिये पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं।
• नीम की 20 पत्तियाँ पीसकर एक कप पानी में मिलाकर पिलाने से हैजा़ ठीक हो जाता है।
• निबोरी नीम का फल होता है, इससे तेल निकला जाता है। आग से जले घाव में इसका तेल लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है।
• नीम का फूल तथा निबोरियाँ खाने से पेट के रोग नहीं होते।
• नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
• छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग़ तथा अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं।

Friday, 12 February 2016

घी को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है,घी, ड्राइ स्किन सॉफ्ट बना देता है

घी को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। कहते हैं काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।
देसी गाय का घी शरीर के विकास और रोग-निवारण के साथ पर्यावरण-शुद्धि का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके सेवन से ताकत, वीर्य व आयुष्य बढ़ता है। एसिडिटी खत्म होती है। यह त्वचा के लिए भी किसी वरदान की तरह काम करता है। आइए आज जानते हैं घी कैसे बना सकता है आपकी स्किन को ग्लोइंग…
1.स्किन को स्मूथ बनाने में
घी, ड्राइ स्किन सॉफ्ट बना देता है, क्योंकि यह त्वचा की कोशिकाओं तक जाता है। इसे लगाने के लिए पहले थोड़े से घी को हल्का गर्म कर लें और फिर शरीर पर 5 मिनट तक मसाज करें। उसके आधे घंटे के बाद स्नान कर लें।
 
2. चेहरे के लिए करता है मॉइश्चराइजर का काम
यह आपके नाजुक चेहरे के लिए भी मॉइश्चराइजर का काम करती है। अपने हाथों में घी और पानी की एक सीमित मात्रा ले कर मिलाएं और उससे अपने चेहरे की मसाज करें। फिर 15 मिनट के बाद चेहरा ठंडे पानी से धो लें। घी को हफ्ते में 2-3 बार जरूर लगाएं, इससे चेहरा एकदम सॉफ्ट हो जाएगा।
3.चमकदार चेहरे और गोरे रंग केे लिए
यदि आपको स्किन को शाइनी और फेयर बनाना है तो घी लगाने से बेहतर उपाय और कुछ नहीं है। घी चेहरे के नेचुरल ग्लो को बनाए रखता है। घी से लगभग 20 मिनट तक चेहरे पर अच्छे से मसाज करें और 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। सोने से पहले नाक में एक बूंद घी डालने से रंग निखरने लगता है। 
 
4. झुर्रियां मिटाता है
घी एक बेस्ट एंटी एजिंग प्रोडक्ट है। यदि इससे रोजाना चेहरे की मसाज की जाए तो चेहरे की कोशिकाएं स्वस्थ बनेगी और आप जवान दिखेंगे।
5. काले घेरे मिटाए
रात को सोने से पहले आंखों के नीचे घी लगा लें। दूसरे दिन सुबह सादे पानी से आंखों को धो लें। ऐसा रोज कीजिए और फर्क देखिए।
 6. थकी आंखों में फ्रेशनेस भरे
डार्क सर्कल मिटाने के साथ यह आंखों की थकान को भी दूर करता है। आंखों के चारो ओर घी की मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है, जिससे आंखों को आराम मिलता है और थकान दूर होती है।
7. फटे होंठो को ठीक करे
होंठो पर देसी घी से मसाज करने से फटे होंठो की समस्या दूर होगी। यदि होंठ काले हैं तो वो भी गुलाबी हो जाएंगे।

शहद और दालचीनी का मिश्रण

शहद को प्राचीन समय से ही सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए बहुत उपयोगी माना गया है. इसी तरह खाने में दालचीनी का प्रयोग स्वाद और सेहत दोनों के लिए ही बहुत अच्छा होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों को अगर एक साथ खाया जाए तो शरीर को कैसे फायदा मिलता है?
शहद और दालचीनी का मिश्रण बहुत ही प्रभावी है, जिससे कई तरह के रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. आयुर्वेदिक चिकित्‍सा में चीनी की जगह शहद का प्रयोग दवा बनाने में किया जाता है.
- दालचीनी और शहद का मिश्रण हार्ट अटैक के जोखिम से बचाता है. यदि आप रोज दालचीनी पाउडर और शहद के पेस्‍ट को ब्रेकफास्‍ट में खाएं तो यह आपका कोलेस्‍ट्रॉल लेवल कम करने में मदद करता है.
- दालचीनी और शहद को मिलाकर रोज खाने से गठिया रोग के दर्द में भी राहत मिलती है.
- रोज सुबह एक कप गर्म पानी, दालचीनी और शहद मिला कर पीने से जोड़ों के पुराने दर्द से राहत मिलती है.
- एसिडिटी में गर्म पानी में शहद और दालचीनी मिला कर पीने से आराम मिलता है और पाचन क्रिया अच्छी रहती है.
- ज्यादा हेवी खाना खा लिया है तो गर्म पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से यह आसानी से पच जाता है.
- वजन कम करने के लिए लिए आप इसे चाय के रूप में भी पी सकते हैं.
- सर्दी-जुकाम में भी गर्म पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
- सर्दी में अगर ठंड की वजह से सिर में दर्द हो रहा हो तो दालचीनी के पाउडर का लेप लगाना फायदेमंद रहता है.
- नियमित रूप से शहद और दालचीनी का सेवन करने से तनाव में राहत मिलती है.

कौन सा पौधा‬ है काम का और किस बीमारी में

 कौन सा पौधा‬ है काम का और किस बीमारी में
एलोवेरा
* एलोवेरा को चित्र कुमारी, घृत कुमारी आदि नामों से भी जाना जाता है। यह गूदेदार और रसीला पौधा होता है। एलोवेरा के रस को अमृत तुल्य बताया गया है। आइए जानें, इसे आप अपनी किन शारीरिक समस्याओं के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले तो यह बता दें कि इसका इस्तेमाल आपको लंबे समय तक जवां बनाए रखता है। इस पौधे का रस ही सबसे अहम हिस्सा है, जिसे एलो जेल के नाम से जाना जाता है और इसे पीने से आप खुद को स्वस्थ्य और तरोजाता महसूस करेंगे। वैसे तो इसका रस बालों में लगाने से बाल काले, घने और नर्म रहते हैं, लेकिन कहते हैं कि यह ‪#‎गंजेपन‬ को भी दूर करने की ताकत रखता है। सर्दी-खांसी में भी इसका रस औषधि का काम करता है। इसके पत्ते को भूनकर रस निकाल लें और फिर इसका आधा चम्मच जूस एक कप गर्म पानी के साथ लेना फायदेमंद बताया जाता है। फोड़े-फुंसी पर भी यह गजब का असर करता है। इसके अलावा ‪#‎मुहांसे‬, ‪#‎फटी‬ एड़ियां, सन बर्न, आंखों के चारों ओर ‪#‎काले‬ धब्बे को भी यह दूर करता है। इन सबके अलावा बवासीर, गठिया रोग, कब्ज और हृदय रोग तथा मोटापा आदि के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
पत्थरचट्टा
* यदि पेट में पथरी‬ है तो यह आपके काम आ सकता है। इसके दो पत्तों को अच्छी तरह से धोकर सुबह सवेरे खाली पेट गर्म पानी के साथ चबा के खाएं, एक हफ्ते के अन्दर पथरी को यह खत्म कर देता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड या सिटी स्कैन जरूर करा लें। पत्थरचट्टा के एक चम्मच रस में सौंठ का चूर्ण मिलाकर खिलाने से पेट दर्द से राहत मिलती है। यह पथरी के अलावा सभी तरह के ‪#‎मूत्र‬ रोग में लाभदायक होता है।
शंखपुष्पी
*अक्सर पढ़ाई में कमजोर रहने वाले बच्चों के लिए शंखपुष्पी की पत्ती और तना के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। इसके लगातार इसेताम से बच्चों की ‪#‎बुद्धि‬ तीक्ष्ण और शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। शंखपुष्पी को शक्तिशाली ‪#‎मस्तिष्क‬ टॉनिक, प्राकृतिक स्मृति उत्तेजक, और एक अच्छी तनाव दूर करने की औषधी माना गया है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल अस्थमा के लिए किया जाता है। इसे ‪#‎अल्सर‬ और दिल की बीमारी आदि के लिए भी बेहतरीन माना जाता है।
अश्वगंधा

* अश्वगंधा के पौधे में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो वजन घटाने, लकवा आदि से लड़ने में आपकी मदद करते हैं। ये पौधे बुखार, संक्रमण और सूजन आदि शारीरिक समस्याओं के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। अश्वगंधा चाय पौधों की जड़ों और पत्तियों से बनी होती है। स्कूली बच्चों की ‪#‎याद्दाश्त‬ को बढ़ाने में मदद करता है। गर्भवती महिलाओं को भी इसके सेवन से फायदा होता है, क्योंकि यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसमें हार्ट‬ अटैक के खतरे को कम करने की क्षमता मौजूद होती है। यह मधुमेह से ग्रसित लोगों में ‪#‎मोतियाबिंद‬ जैसी समस्या पर भी लगाम लगाता है। यहां तक कि अश्वगंधा के बारे में यहां तक कहा जाता है कि यह इसमें मौजूद ऐंटिऑक्सीडेंट कैंसर से लड़ने में भी मदद करता है। वैसे, इसके इस्तेमाल के लिए पहले डॉक्टरी सलाह ले लेनी चाहिए। वैसे अश्वगंधा चाय से किसी भी अन्य गंभीर बीमारी के उपचार से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। अश्वगंधा से शरीर मजबूत होता है। वजन कम करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। प्लेग के लिए यह रामबाण औषधि है। इससे ‪#‎टूटी‬ हड्डी को भी जोड़ा जाता है।
नीम

* नीम काफी आक्सीजन उत्सर्जित करता है, जिससे आस-पास की हवा शुद्ध रहती है। देखा जाए तो नीम के फायदे अंतहीन हैं। इसे 'घर का डॉक्टर' कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। यदि ‪#‎सर्दी‬-जुकाम हो तो इसकी पत्तियों को उबाल लें और इस पानी के भाप को सांस के जरिए अंदर लें। काफी आराम मिलेगा। नीम की पत्तियों को पीसकर चोट या मोच की जगह लगाने से काफी आराम मिलता है। कहते हैं बुखार में भी इसकी पत्तियां काम आती हैं। एक कप पानी में नीम की 4-5 पत्तियां उबालकर पीना फायदेमंद होता है बुखार के लिए। किसी तरह के त्वचा रोग से लड़ने में भी यह काफी मदद करता है। नहाते समय पानी में इसकी कुछ पत्तियों को मसलकर डाल दें और फिर इसी पानी से नहाएं।
तुलसी
* औषधीय पौधों में तुलसी की सबसे ज्यादा अहमियत है। इसमें रोग के कीटाणुओं को नष्ट करने की गजब की शक्ति पाई जाती है। इसकी पत्तियों में अलग प्रकार का तेल मौजूद होता है, जो पत्तियों से निकलकर धीरे-धीरे हवा में फैलने लगता है। इससे तुलसी के आस-पास की वायु हमेशा शुद्ध और कीटाणु मुक्त होती है और इस वायु के सम्पर्क में आनेवाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। तुलसी की पत्ती, तना और बीज ‪#‎गठिया‬, ‪#‎लकवा‬ तथा ‪#‎वात‬ दर्द में भी फायदेमंद होते हैं। हर सुबह खाली पेट तुलसी की पत्तियां खाने से रक्त विकार, वात, पित्त जैसी कई समस्याएं दूर होने लगती हैं।
चिरौता

* कहते हैं चिरौता का रस ‪#‎जॉन्डिस‬ जैसी बीमारियों से लड़ने की ताकत रखता हैष इसकी पत्तियों और बीजों का काढ़ा बना लेंष काढ़ा बनाने के लिए इसकी 50 ग्राम पत्ती को दो कप पानी में उबाल लें। जब यह पानी उबलकर आधी बचे तो इसका सेवन करें, यह जॉन्डिस के असर को कम करता है। इसकी पत्तियां पीसकर यदि दाद-खाज, खुजली पर लगाया जाए तो काफी फायदा होता है।

Thursday, 11 February 2016

7 चीजें दोबारा गर्म करके खाने से वे सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

क्या आप किसी खाने की चीज को बार-बार गर्म करके खाते हैं? यह अच्छी आदत है, लेकिन कुछ चीजें दोबारा गर्म करके खाने से वे सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। हम बता रहे हैं ऐसी 7 चीजों के बारे में जिन्हें दोबारा गर्म करने से बचना चाहिए :
1. आलू
आलू को गर्म करने के बाद जब ठंडा किया जाता है, तो उस दौरान इसमें बोटूलिज्म नामक एक बैक्टीरिया पनपने लगता है। इससे आलू जहरीले हो जाते हैं और इनसे फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसलिए आलू को एक ही बार गर्म करके उसे तत्काल फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख देना चाहिए। 
 2. पालक

पालक में आयरन और नाइट्रेट काफी होते हैं। अगर इसे रीहीट किया जाएगा तो इसमें मौजूद नाइट्रेट, नाइट्राइट और कार्सिनोजेनिक (जहरीला) तत्वों में में बदल जाएगा। इसलिए पालक को दोबारा गर्म करने से बचना चाहिए। 
 3. चिकन

अगर आप फ्रिज में रखे हुए ठंडे चिकन को दोबारा गर्म करके खाते हैं तो इससे उसमें मौजूद प्रोटीन का कम्पोजिशन बदल सकता है। इससे इसे खाने के बाद पचाने में दिक्कत हो सकती है और इन-डाइजेशन की प्रॉब्लम हो सकती है।
 4. तेल

कई स्टडीज में साबित हो चुका है कि तेल को दोबारा गर्म करने से इसमें aldehydes नामक केमिकल निकलता है जो टाॅक्सिक होता है। सोयाबीन और सनफ्लाॅवर ऑइल भी इससे बचे हुए नहीं हैं। यह केमिकल न्यूरो से संबंधित रोगों और केंसर के लिए जिम्मेदार होता है। 
 5. मशरूम

इसमें प्रोटीन कंपोजिशन बहुत ही जटिल होता है। इसलिए एक बार में जितने मशरूम खाना हो, उतने ही बनाएं ताकि इन्हें रीहीट करने की जरूरत न पड़े। दोबारा गरम करने से इसमें प्रोटीन ऐसे तत्वों में बदल सकते हैं जिनसे इन्हें पचाने में दिक्कत हो सकती है। 
 6. चुकंदर (बीटरूट)

पालक की तरह चुकंदर में भी नाइट्रेट की मात्रा अधिक होती है। इसलिए चुकंदर को रीहीट करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर चुकंदर की सब्जी बच जाए तो इसे दोबारा गर्म करने से अच्छा है कि ठंडी ही खा लें। 
 7. अंडे

अंडे को भी दोबारा गर्म करने से बचना चाहिए। उच्च तापमान पर अंडे को दोबारा गर्म करने से वह टॉक्सिक हो जाता है। इसका निगेटिव इफेक्ट डाइजेस्टिव सिस्टम पर हो सकता है।

Saturday, 6 February 2016

तिल के तेल में बालों को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसे नरिश भी करते हैं

तिल के तेल में विटामिन E,B complex और मैगनेशियम, कैल्शियम और फॉसफोरस जैसे मिनरल्स के अलावा प्रोटीन काफी मात्रा में मौजूद होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसे नरिश भी करते हैं. 

बालों को बढ़ने में करे मदद
क्योंकि ये तेल बालों की गहराई तक पहुंचकर उसे पोषण देता है, इसलिए आपके स्कैल्प में ब्लड सर्कुलशन बढ़ता है. इस तरह आपको मिलते हैं लंबे और लहराते बाल. इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की ज़रूरत भी नहीं है. बस हफ्ते में एक बार इस तेल से अपने स्कैल्प को मसाज करें. आप अपने बालों की लंबाई में आया फर्क खुद महसूस करेंगी.
बालों को बनाए हेल्दी
अगर केमिकल्स, पॉल्यूशन और धूप की वजह से आपके बाल खराब हो चुके हैं तो ऐसे मामले में तिल का तेल आपके लिए किसी मसीहे से कम नहीं होगा. जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि तिल के तेल की खासियत है कि ये बालों की गहराई तक पहुंचकर उसे नरिश करता है. इसकी यहीं खासियत बालों को इन हानिकारक चीज़ों से बचाकर रखने में मदद करता है.
ये है एक नैचुरल सनस्क्रीन
सूरज की किरणों से निकलने वाले UV रेज़ स्किन और बालों को काफी नकसान पहुंचाते हैं. लेकिन तिल का तेल इस्तेमाल करके आप इन्हें हानिकारक UV रेज़ से बचा सकती हैं. दरअसल तिल का तेल बालों और स्किन पर एक प्रोटेक्टिव कोट बना कर इन्हें किसी भी तरह के डैमेज से बचा कर रखता है.
 
डैंड्रफ को भगाए दूर
डैंड्रफ को अपनी ज़िंदगी से हमेशा के लिए दूर करना चाहती हैं? तो तिल के तेल की मदद लें. सोने से पहले उंगुलियों की मदद से अपने स्कैल्प पर तिल के तेल से मसाज करें और सुबह बालों को धो लें.  बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा हर रोज़ करें और बस डैंड्रफ को अपनी ज़िंदगी से कोसो दूर भगाएं.
 
रूखे बाल और स्प्लिट-एंड्स से दिलाए छुटकारा
अगर आपको भी स्प्लिट-एंड्स के साथ कर्ली रफ हेयर की समस्या है तो हफ्ते में एक बार तिल के तेल का इस्तेमाल करें. हमारा दावा है कि इससे मिलने वाले रिजल्ट को देखकर आप हैरान रह जाएंगी.
 
एजिंग की निशानियों कहें अलविदा
हमें यकीन है कि एजिंग की समस्या से बचने के लिए आप ढेर सारी एंटी-एजिंग क्रीम्स का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटती होंगी. लेकिन क्या आप जानती हैं कि स्किन एजिंग से बचने के लिए तिल का तेल सबसे कारगर उपाय है. इसमें sesamol एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होने की वजह से ये झुर्रियों और फाइन लाइन्स जैसी एजिंग की निशानियों को खत्म करने में मदद करता है. हर रोज़ सोने से पहले तिल के तेल की एक पतली सी लेयर चेहरे पर लगाएं और एजिंग की परेशानियों को कहें अलविदा.
 
स्किन को करे डिटॉक्सिफाइ
आज हर रोज़ पॉल्यूशन बढ़ाता जा रहा है और इसका सबसे ज़्यादा खामियाजा हमारी स्किन को भुगतना पड़ता है. हमारी स्किन में कुछ ऐसे टॉक्सिन्स मौजूद होते हैं, जो तेल में आसानी से घुल जाते हैं. इन टॉक्सिन्स को आप तिल के तेल की मदद से छुटकारा पा सकती हैं. इसके लिए पहले तेल हल्का गर्म कर लें और फिर पूरी स्किन पर लगाएं. 15 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी (सिर्फ पानी, साबुन नहीं) से धो लें.
 
डैमेज्ड स्किन और स्ट्रेच मार्क्स करे ठीक
मसाज थैरेपी के दौरान तिल के तेल के इस्तेमाल से डैमेज़्ड स्किन को ठीक किया जा सकता है. ये हमारी स्किन में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है. स्ट्रेच मार्क्स और सेल्युलाइट (cellulite) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए तिल के तेल से बेहतर कोई ऑप्शन नहीं है. आप चाहे तो इसमें bergamot और rosehip जैसे एसेंसिअल ऑयल मिलाकर भी इसे इस्तेमाल कर सकती है.

Thursday, 4 February 2016

शहद शुद्ध होगा या नहीं घर पर अपने हिसाब से जांच सकते हैं

शहद का प्रयोग हर घर में होता है क्‍योंकि यह ऐसी चीज़ है जो स्‍वास्‍थ्‍य के खजाने से भरी हुई है। शुद्ध शहद में विटामिन, प्रोटीन, खनिज और अमीनो एसिड होता है। कुछ लोग शहद का सेवन इसलिये भी नहीं करते क्‍योंकि उन्‍हें डर रहता है कि उनके द्वारा खरीदा गया शहद शुद्ध होगा या नहीं।
बाजार में शहद खरीदने जाओ तो हर ब्रांड 100% शुद्ध शहद देने की गारंटी देता है। पर हम यह कैसे मान लें कि वह शहद शुद्ध है या नहीं? अब आप वहां जा कर शहद की बोतल खोल कर उसकी गुणवत्ता तो नहीं परखने लगेंगे? पर अगर आप चाहें तो उसे घर पर अपने हिसाब से जांच सकते हैं।
आइये जाने कैसे करे शुद्ध शहद की पहचान :-
  • शहद में गिरी हुई मक्खी यदि स्वयं उसमें से बाहर निकल आये और थोड़ी देर में उड़ सके तो जान लेना चाहिए कि ये शहद शुद्ध है।
  • खास बात ये है की शुद्ध शहद को कुत्ते नहीं खाते। शुद्ध शहद लगाये हुए खाद्य पदार्थ को कुत्ते छोड़ देते हैं।
  • शुद्ध शहद की बूँद पानी में डालने से तली पर बैठ जाती है।
  • शहद में रूई की बाती डुबाकर दीपक जलाने से बिना किसी चटर पटर की आवाज के जलने लगे तो शहद शुद्ध मानना चाहिए।
  • बाजार में अनेकों कंपनियों का शहद प्रचुरता में उपलब्ध है। उसे कृत्रिम शहद माना जा सकता है। कृत्रिम शहद बनाने के लिए चीनी की चाशनी के टेंकर को छह सात महीने तक जमीन में दबाकर रखा जाता है और उस से बनाया हुआ कृत्रिम शहद प्रयोगशाला में भी पास हो जाता है। अन्य प्रकार से भी कृत्रिम शहद बनाया जाता है। आजकल ज्यादा प्रमाण में कृत्रिम शहद ही मिलता है। बाकि आप स्वयं भी समझदारी से काम लीजिये ।

क्‍या करें जब आंख में मिर्ची चली जाए

क्‍या करें जब आंख में मिर्ची चली जाए
हालांकि दस्‍ताने पहनकर आंखों में मिर्च लगने जैसी दुर्घटनाओं से स्‍वयं को बचाने का सबसे अच्‍छा तरीका है, लेकिन हममें से ज्‍यादातर लोग ऐसा करने में विफल होते हैं। तो जानिए आखिर मिर्च लगने पर क्‍या किया जाये।
1 आंखों में मिर्च लगना
खाना बनाने के लिए मिर्च कटाने की जरूरत हर किसी को होती है। लेकिन अगर गलती से मिर्च वाले हाथ अगर आंखों में लग जाये, तो फिर इस दर्द और जलन से कोई भी कुक बच नही सकता। हालांकि दस्‍ताने पहनना ऐसी दुर्घटनाओं से स्‍वयं को बचाने का सबसे अच्‍छा तरीका है, लेकिन हममें से ज्‍यादातर लोग ऐसा करने में विफल होते हैं। मिर्च की जलन पर आपके चीखने-चिल्‍लाने का भी कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन केवल आप उस समय दर्द से ग्रस्‍त होते हैं। आइए हम आपको बताते है कि गलती से मिर्च के आंख में जाने पर आपको क्‍या उपाय करने चाहिए।
2 दूध
दूध, मिर्च से होने वाली जलन को बेअसर करने में मदद करता है। ज्‍यादातर मिर्च में तेल होता है और दूध तेल को बाहर निकालने में मदद करता है। जबकि पानी से आप आंख को सिर्फ धो सकते हैं। इससे आपको कोई राहत नहीं मिलती। इसलिए बेहतर महसूस होने तक अपनी आंख को बार-बार दूध से धोये।
3 सेलाइन सलूशन
आप अपने शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली की सहायता करने की कोशिश के लिए आंखों को सेलाइन और लेंस सलूशन के साथ धोये। और बाद में कुछ समय के लिए वैकल्पिक रूप से आंख को झपकाने का प्रयास करें। साथ ही आंख को छूने के लिए सख्ती से मना किया जाता है क्‍योंकि ऐसा करना केशिकाओं के पुन: सक्रिय होने और दर्द को और बढ़ाने का काम करती है।
4 पानी
अगर आपके पास कोई अन्‍य विकल्‍प उपलब्‍ध नहीं है, तो ठंडे पानी से आंखों को धोने का प्रयास करें। लेकिन, काली मिर्च का रस, तेल आधारित तरल होने के कारण, आप इसे आसानी से धो नहीं सकते। लेकिन फिर भी आप आंखों को ठंडे पानी के प्रवाह के नीचे या (एक कटोरी में डूबाकर) अपनी आंख पानी के भीतर खोलने की कोशिश करें। पहली बार आंख खोलना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए आंखों को झपकाकर आंसू के माध्‍यम से काली मिर्च के रस को निकालने की कोशियश करें।
5 तौलिया
अगर दर्द आपको लगातार परेशान कर रहा है, तो दर्द कम और सूजन को दूर करने के लिए अपनी आंख के ऊपर ठंडे गीले तौलिये को लगाकर लेट जाना चाहिए। साथ ही मिर्च के संपर्क में आने के बाद तुरंत हाथों को धोना बहुत महत्‍वपूर्ण होता है।
6 तेल
अचानक से आंखों में लगने वाली मिर्च को साफ करने के लिए ऑलिव ऑयल का उपयोग करें। तेल मिर्च में मौजूद तेल को धोने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। साथ ही काली मिर्च के रस में तेल की उपस्थिति के कारण अकेले पानी तेल को नहीं धो सकता, इसलिए काली मिर्च के रस को अपने हाथों से दूर करने के लिए जैतून के तेल का उपयोग करें।
8 साबुन
हाथों से मिर्च को साफ करने के लिए डिश साबुन भी बहुत उपयोगी होता है। डिश साबुन, नियमित रूप से इस्‍तेमाल होने वाले बाथिंग साबुन की तुलना में प्रभावी ढंग से तेल को रोकने और निकालने में मदद करता है।
9 शुद्ध घी
मिर्च लगने से आंखों में होने वाली जलन को दूर करने के लिए शुद्ध घी का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए रुई के फाहे को ठंडे पानी में भिगोकर शुद्ध घी लगाकर आंखों पर रखने से आंखों के दर्द और जलन में लाभ मिलता है।

केले के 10 साइड इफेक्ट



केले के 10 साइड इफेक्ट
हालांकि केले के लाभों की सूची बहुत लंबी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अनेक साइड इफेक् भी है। आपको ताज्जुब हो रहा हैं ? तो चलिये हैरान होने के लिए तैयार हो जाइए।
केले के साइड इफेक्ट
केला विटामिन, प्रोटीन अन्य पोषक तत्वों से भरपूर फल है। इसमें थाइमिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और फॉलिक एसिड के रूप में विटामिन '' और विटामिन 'बी' पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। इसके अलावा केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। केला मैग्नेशियम से भरपूर होने के कारण बहुत जल्दी पच जाता है और यह मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। हालांकि केले के लाभों की सूची बहुत लंबी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अनेक साइड इफेक् भी है। आपको ताज्जुब हो रहा हैं ? तो चलिये हैरान होने के लिए तैयार हो जाइए।
1 वजन बढ़ना
हालांकि केले में आपके पसंदीदा चिप् के एक पैकेट या कुकीज के एक बॉक् की तुलना में कम कैलोरी होती है। लेकिन फिर भी एक केले में आमतौर पर 100 से 120 कैलोरी होती है। जिससे आपका वजन जल्द ही बढ़ने लगता है।
2 शुगर की अधिक मात्रा
उम्र के तीसवे दशक के बाद, चीनी लगभग हर व्यक्ति के स्वास्थ् को नुकसान पहुंचाती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार, केले को मध्य स्तर के ग्लाइसेमिक भोजन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब है कि इसमें ग्लाइसेमिक सूचकांक रक्त शर्करा के स्तर को बदलने के लिए काफी अधिक होता है। इसके अलावा, इसी तरह के शुगर स्तर के साथ केले में फाइबर की मौजूदगी के कारण अन् फलों की तुलना में इसे पचाने में अधिक समय लगता है।
3 हाइपरकेलेमिया (Hyperkalemia) की संभावना
हाइपरकेलेमिया एक गंभीर स्वास्थ् स्थिति है, जो बहुत अधिक पोटेशियम के सेवन से होती है। इसमें पल् अनियमित, मतली और दिल की धड़कन की दर में देरी जैसे लक्षण देखने को मिलते है। इस तरह से केले के अधिक सेवन से आप इस समस्या से ग्रस् हो सकते हैं क्योंकि केला पोटेशियम का समृद्ध स्रोत है। और शायद ही केले तुलना में किसी अन् खाद्य पदार्थ में इतना पोटेशियम हो।
4 दांतों का गिरना
चीनी को दांतों के टूटने का सबसे आम कारण माना जाता है। यह चॉकलेट या मिठाई के अधिक सेवन का परिणाम हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केला भी दांत के टूटने के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टार्च मुंह में धीरे-धीरे घुलता है जबकि शक्कर तेजी से घुल जाता है। इसके अलावा, केले जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन से कण दांतों के बीच में फसकर बैक्टीरिया को आकर्षित करके अधिक कैविटी का कारण बनते है।
5 पेट के आस-पास फैट
यह बात आपको अविश्वसनीय लग सकती हैं, लेकिन केला पेट की चर्बी को बढ़ाने में योगदान देता है। यह बात तो हम जानते हैं कि केला लगभग शून्य फैट के साथ बहुत सारे कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता हैं। यह अकेला मोटापे का कारण नहीं होता, बल्कि कार्बोहाइड्रेट के साथ बहुत अधिक कैलोरी भी होती है। और यह तो आप जानते ही हैं कि अधिक कैलोरी का क्या मतलब होता है?
6 प्रोटीन की कमी
प्रोटीन को केले में खोजना, वास्तव में बहुत कठिन काम है। जी हां आप मानो या मानो, लेकिन एक 100 ग्राम केले में मात्र 1 ग्राम प्रोटीन होता है। मोटापे को कम करने में प्रोटीन प्रमुख भूमिका निभाता है। और कम प्रोटीन फैट के भंडारण के एंजाइमों की गतिविधि में वृद्धि करता है।
7 पेट दर्द
मतली के साथ-साथ केला कई प्रकार की गैस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्याओं का कारण भी होता है। कुछ रोगियों को तो इसको खाने के तुरंत बाद उल्टी या दस् का अनुभव होता है। इसके अन्य संभावित लक्षणों में पेट में ऐंठन शामिल हैं।
8 सिरदर्द
अधिक केले खाने से सिरदर्द की समस्या को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि केले में मौजूद कुछ अमीनो एसिड रक् वाहिकाओं को चौड़ा करने के लिए जाने जाते है। और रक् वाहिकाओं के चौड़ा होने से सिर में दर्द होने लगता है। अतिपक्व केला खाने से यह विशेष रूप से समस्याग्रस् हो सकता है।
9 तंत्रिका क्षति
क्या आप जानते हैं कि बहुत कम अवधि में कई केले खाना तंत्रिका क्षति का कारण बन सकता है। आहार में केवल केले खाने वालों के लिए इसका खतरा ज्यादा होता है। केले में विटामिन बी-6 की सही मात्रा सही खुराक लेने वालों के लिए स्वस् होती है। लेकिन बहुत अधिक सेवन हाथ-पॉव सुन् करने के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र में स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है।
10 गैस की समस्या
हालांकि गंभीर रूप से नहीं, लेकिन केले के जरूरत से ज्यादा सेवन करने से गैस की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसा केले में मौजूद दो सामग्री, घुलनशील फाइबर और फ्रुक्टोज के कारण होता है। यह दोनों गैस के लिए योगदान कर सकते हैं।